कांग्रेस के ‘कैप्टन’ के दांव को बीजेपी ने किया फेल, चंडीगढ़ नगर निकाय चुनाव में बंपर जीत

गुजरात विधानसभा चुनाव में बीजेपी के सामने चुनौती पेश करने वाली कांग्रेस इस बार चंडीगढ़ नगर निकाय चुनाव में चित हो गई है.

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गुजरात विधानसभा चुनाव में बीजेपी के सामने चुनौती पेश करने वाली कांग्रेस इस बार चंडीगढ़ में चित हो गई है. गौर करने वाली बात यह है कि पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की अगुवाई में कांग्रेस की सरकार होने के बावजूद चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव में बीजेपी ने जीत दर्ज की है. बताया जा रहा है कि चंडीगढ़ निकाय चुनाव में कांग्रेस की जीत सुनिश्चित करने के लिए कैप्टन अमरिंदर सिंह ने तैयारी की थी.

चंडीगढ़ नगर निगम के महापौर, वरिष्ठ उप महापौर और उप महापौर के लिए मंगलवार को हुई वोटिंग में तीनों पदों पर बीजेपी ने जीत दर्ज की है. 27 सदस्यीय चंडीगढ़ नगर निगम में बीजेपी के देवेश मोदगिल महापौर पद पर विजयी हुए हैं. वहीं बीजेपी के ही गुरप्रीत सिंह ढिल्लों ने वरिष्ठ उप महापौर और विनोद अग्रवाल ने उप महापौर के पद पर जीत दर्ज की है. मोदगिल चंडीगढ़ नगर निगम के 22वें महापौर होंगे.

मोदगिल को 22 मत मिले जबकि कांग्रेस प्रत्याशी देवेंद्र सिंह बाबला को पांच मत मिले. ढिल्लों को कांग्रेस प्रत्याशी शीला फूल सिंह के छह मतों के मुकाबले 21 मत मिले.

अग्रवाल को कांग्रेस प्रत्याशी रविंदर कौर के चार मतों के मुकाबले 22 मत मिले जबकि एक मत अमान्य घोषित कर दिया गया. चंडीगढ़ नगर निगम में भाजपा के 20, कांग्रेस के चार, शिरोमणि अकाली दल के एक उम्मीदवार हैं जबकि एक निर्दलीय और एक वोट भाजपा की मौजूदा सांसद किरण खेर का है.

नौ मनोनीत पार्षद इस साल वोट नहीं कर पाए क्योंकि पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने अगस्त 2017 को उनके वोट देने के अधिकार पर रोक लगा दी थी. चुनावी दौड़ में अच्छा-खासा बहुमत होने के बावजूद भाजपा को पार्टी के भीतर मतभेदों का सामना करना पड़ा जिसे कल सुलझा लिया गया.

भाजपा की बागी और निवर्तमान महापौर आशा कुमारी जायसवाल और रवि कांत शर्मा ने पहले निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर अपना नामांकन दायर किया था लेकिन कल उन्होंने अपने नाम वापस ले लिए. मोदगिल को पूर्व भाजपा सांसद सत्य पाल जैन का करीबी माना जाता है.

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