जानिए मेट्रो के किराये बढ़ोतरी पर किस तरह केजरीवाल मूर्ख बना रहे है दिल्लीवासियों को

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दिल्ली मेट्रो का किराया बढ़ने पर जन-आंदोलन करने का ड्रामा करने वाली आम आदमी पार्टी का कोई प्रवक्ता इस पर सफाई देगा, कि छोटी दूरी के सफर का किराया 5 ₹ और 30 कि.मी. से लम्बी दुरी का किराया 10 ₹ बढ़ाने से ओला-उबर जैसी कम्पनियो को कैसे फायदा पहुंचेगा?

आम आदमी पार्टी और उसके तर्क हमेशा की आपस में विरोधाभासी हैं। यह हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि आम आदमी पार्टी के नेता और दिल्ली के कैबिनेट मंत्री गोपाल राय ने दिल्ली मेट्रो के किराए को लेकर कुछ ऐसी बात कह दी है जिसको सुनकर कोई भी पढ़ लिखकर अपनी ज़िंदगी बसर कर रहा आदमी यही कहेगा कि उसके ऊपर किस तरह के अल्पबुद्धि वाले लोग राज कर रहे हैं। दिल्ली में 67 सीट लाने वाली आम आदमी पार्टी के नेता गोपाल राय का कहना है कि दिल्ली के मेट्रो किराया बढ़ने से असली फायदा ओला और उबर जैसी कंपनियों को होगा। यह तर्क हलक से उतरता दिख नहीं रहा है कि छोटी दूरी के सफर का किराया 5 ₹ और 30 कि.मी. से लम्बी दुरी का किराया 10 ₹ बढ़ाने से ओला-उबर जैसी कम्पनियो को कैसे फायदा पहुंचेगा? महज 5-10 ₹ किराया बढ़ने से आम जनता मेट्रो छोड़कर ओला-उबार में यात्रा शुरू कर देगी क्या? यह कोई तर्कसंगत बात तो लग नहीं रही है।



आम आदमी पार्टी के नेताओ द्वारा कहा जा रहा है कि इस पर वह और उनकी पार्टी जन आंदोलन करेगी। कल सिचवालय के सामने आम आदमी पार्टी के 20-25 पेड वोलन्टीयर्स के साथ 4-5 नेता मेट्रो के बाहर जन आंदोलन करते नजर आ रहे थे, साफ़ नजर आ रहा है की आम आदमी पार्टी की जनता में साख क्या बची है। केजरीवाल पहले ही केंद्र से दिल्ली मेट्रो को दिल्ली के हाथों में देने की भीख मांग ली है जिससे पता चल रहा है कि आखिर केजरीवाल किस स्थिती तक आ चुके हैं, क्योंकि उनकी इन हरकतों को देखकर समझ में आ रहा है कि, आखिर देश में कितने सारे नेता ऐसे हैं जो मात्र ओछी राजनीति के लिए तर्कों की बलि चढ़ाने से भी पीछे नहीं हटते हैं।

आम आदमी पार्टी के नेता गोपाल राय से यह ज़रूर पूछा जाना चाहिए कि आखिर उनके हिसाब से किस तरह से दिल्ली मेट्रो का किराया बढ़ने से ओला और उबर को फायदा पहुंचेगा? कम दूरी का किराया 5₹ अगर बढ़ता है तो ओला और उबर के लिए यह किस प्रकार का फायदा हुआ है? यही नहीं,यदि दिल्ली मेट्रो केजरीवाल के हाथों में भी दे दी जाए तब भी वो कहाँ से इन बढ़े हुए दामों के लिए सब्सिडी देंगे और पैसा कहां से लाएंगे क्योंकी दिल्ली सरकार की ‘बैलेंस शीट’ तो ऐसे ही 6 करोड़ के समोसे और 523 करोड़ के विज्ञापन बजट से डांवाडोल नज़र आती है।

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